सुवेंदु का BJP में शामिल होना ममता के लिए कितना बड़ा झटका, समझिए सियासी मायने

कोलकाता पश्चिम बंगाल सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खास सुवेंदु अधिकारी अब बीजेपी के हो गए हैं। कहा जा रहा है कि सुवेंदु टीएमसी में हो रही उनकी उपेक्षा को लेकर नाराज चल रहे थे। अमित शाह की रैली के दौरान उन्होंने खुलेआम गृहमंत्री के साथ मंच साझा किया, जिसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया। ममता बनर्जी के दाहिने हाथ कहे जाने वाले सुवेंदु अधिकारी के बीजेपी में शामिल होने से टीएमसी चीफ को बड़ा सियासी झटका लगा है। पार्टी में शामिल होने के बाद सुवेंदु ने सीधा हमला ममता बनर्जी क सरकार पर बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। यदि राज्य को मुक्त करना है, तो इसकी बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपने की आवश्यकता है। पोस्टरों से गायब हो गई थीं ममता और टीएमसी दक्षिण बंगाल के कई जिलों में इन दिनों ‘आमरा दादार अनुगामी’ के पोस्टर काफी जगह-जगह देखने को मिल रहे थे। आमरा दादार अनुगामी यानी हम दादा के अनुयायी है। बताया जा रहा है कि सुवेंदु अधिकारी के समर्थकों ने ये पोस्टर्स थे। पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद के कई इलाकों में ये पोस्टर लगाए जा रहे थे। सुवेंदु के समर्थन में लगे पोस्टरों में न तो ममता बनर्जी का नाम था और न ही टीएमसी का निशान। पोस्टर में हर जगह सिर्फ सुवेंदु अधिकारी की तस्वीर लगी हुई थी। कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के मौजूदा कार्यकाल में परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन मंत्री थे। 27 नवंबर को उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। वह 15 वीं और 16वीं लोकसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। सुवेंदु के नाम के साथ ही 2007 में टीएमसी के नंदीग्राम आंदोलन का जिक्र उठता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में 2007 में हुए इस आंदोलन ने ही बंगाल में दशकों से चले आ रहे लेफ्ट के राज को उखाड़ फेंका था। इस आंदोलन का खाका सुवेंदु ने ही तैयार किया था। पश्चिम बंगाल की 35 विधानसभा सीटों पर सुवेंदु का रुतबा सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी और छोटे भाई दिव्येंदु अधिकारी तामलुक और कांती सीट से टीएमसी सांसद हैं। शिशिर अधिकारी मनमोहन सरकार में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। सुवेंदु अधिकारी पूर्वी मिदनापुर में प्रभावशाली नेता हैं। टीएमसी सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी मिदनापुर, बांकुरा, पुरुलिया, झारग्राम और बीरभूमि के कुछ हिस्सों समेत कुल 35 विधानसभा सीटों पर उनका रुतबा है। नंदीग्राम आंदोलन के आर्किटेक्ट सुवेंदु उस वक्त कांती दक्षिण सीट से विधायक थे। उन्होंने भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमिटी के तहत नंदीग्राम के लोगों को इकट्ठा किया और लेफ्ट सरकार के खिलाफ भूमि आंदोलन की धार तेज कर दी। जब लेफ्ट के 'लोहे का हाथ' अजेय लग रहा था, तब सुवेंदु अधिकारी ही थे, जिन्होंने सीपीआई (एम) के बाहुबली लक्ष्मण सेठ को हराया था। इसी के साथ 'जंगल महल' क्षेत्र यानी पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया, और बांकुरा जिलों में टीएमसी के आधार को मजबूत किया। ममता बनर्जी से इसलिए खफा हुए सुवेंदु सुवेंदु की नाराजगी की वजह यह है कि ममता पार्टी के दूसरे नेताओं की तुलना में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अधिक अहमियत दे रही थीं और अघोषित रूप से उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना चुकी हैं। सुवेंदु जैसे कद्दावर नेता इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। सुवेंदु ने खुल कर कभी भी पार्टी प्रमुख के खिलाफ कुछ नहीं कहा है लेकिन तृणमूल के अंदर वह लगातार निशाने पर रहे।


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