महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की जान को कोरोना से 30% ज्‍यादा खतरा: रिसर्च

नई दिल्‍ली कोविड-19 संक्रमण के कारण समान उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति वाली महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में जान का खतरा 30 प्रतिशत ज्यादा होता है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आयी है। ‘क्लीनिकल इंफेक्शस डिजीजेस’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार कोविड-19 से संक्रमित पुरुष मरीज यदि मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मोटापे से ग्रस्त हैं तो उनकी जान जाने का खतरा अधिक होता है। शोध में अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन (यूएमएसओएम) के वैज्ञानिकों ने देश भर के 613 अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 के करीब 67,000 मरीजों का अध्ययन किया। ध्ययन में कहा गया है कि पहले से ही मोटापे, उच्च रक्तचाप या मधुमेह जैसी समस्याओं से जूझ रहे कोविड-19 से संक्रमित 20 से 39 वर्ष आयु वर्ग के रोगियों को अपने स्वस्थ साथियों की तुलना में जान का जोखिम ज्यादा था। अध्ययन के लेखक एंथनी डी हैरिस ने कहा कि इन सभी जानकारियों से संक्रमित रोगियों के उपचार में मदद मिल सकती है। भारत में 3.05 लाख सक्रिय मरीजभारत में उपचाराधीन कोविड-19 मरीजों की संख्या में और कमी आई है और अब 3.05 लाख संक्रमित ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है जो देश में संक्रमित हुए कुल मरीजों का महज 3.04 प्रतिशत है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने रेखांकित किया कि रोजाना ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि और प्रतिदिन मृतक संख्या में कमी की वजह से उपचाराधीन मरीजों की संख्या में कमी आई है। मंत्रालय ने बताया कि गत 24 घंटे में 29,690 मरीज ठीक हुए हैं जो संक्रमण के नए मामलों से अधिक है और इसकी वजह से कुल उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 3,407 मरीजों की कमी आई है। मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक सहित 10 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं, जहां पर कुल 66 प्रतिशत उपचाराधीन मरीज हैं। मंत्रालय ने बताया कि गत 24 घंटे में 26,624 और लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई। मंत्रालय ने रेखांकित किया कि लगातार पिछले 21 दिन से नए मामलों की संख्या 40 हजार से नीचे रही है जबकि मरीजों के ठीक होने की दर करीब 96 प्रतिशत है यानी अबतक 95,80,402 मरीज ठीक हुए हैं। मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण के नए मामलों के मुकाबले ठीक होने वाले मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से संक्रमण मुक्त होने की दर में सुधार आया है और यह 95.51 प्रतिशत तक पहुंच गई है।


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