चीन पर नजरः हम रजाई में भी ठिठुर रहे, वहां चोटियों पर -30 डिग्री पर भी डटे हैं जवान

आज आपके यहां कितनी ठंड है? ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्‍योंकि उत्‍तर भारत के अधिकतर इलाके इन दिनों शीत लहर की चपेट में है। दिल्‍ली हो या उत्‍तर प्रदेश, न्‍यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे है। इतने कम तापमान में ही हमारी कंपकंपी छूट रही है। अब जरा कल्‍पना कीजिए। तापमान -30 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो तो क्‍या हो? कुल्‍फी जम जाएगी। मगर उस -30 डिग्री वाली ठंड में भी भारतीय सेना के जवान पूर्व लद्दाख की उन चोटियों पर काबिज हैं जिनपर चीन कब्‍जा चाहता है। चारों तरफ बर्फ ही बर्फ है और बर्फ की उसी चादर पर कैंप लगाए हमारे जवान दिन-रात मुस्‍तैद रहते हैं ताकि पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) के किसी भी नापाक मंसूबे को नाकाम किया जा सके।

India China border news: चीन की हर एक नापाक हरकत पर नजर रखने के लिए पूर्वी लद्दाख बॉर्डर से लगती बर्फीली चोटियों पर भारतीय सेना (Indian Army) के रणबांकुरे डटे हुए हैं।


चीन पर नजरः हम रजाई में भी ठिठुर रहे, वहां चोटियों पर -30 डिग्री पर भी डटे हैं जवान

आज आपके यहां कितनी ठंड है? ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्‍योंकि उत्‍तर भारत के अधिकतर इलाके इन दिनों शीत लहर की चपेट में है। दिल्‍ली हो या उत्‍तर प्रदेश, न्‍यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे है। इतने कम तापमान में ही हमारी कंपकंपी छूट रही है। अब जरा कल्‍पना कीजिए। तापमान -30 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो तो क्‍या हो? कुल्‍फी जम जाएगी। मगर उस -30 डिग्री वाली ठंड में भी भारतीय सेना के जवान पूर्व लद्दाख की उन चोटियों पर काबिज हैं जिनपर चीन कब्‍जा चाहता है। चारों तरफ बर्फ ही बर्फ है और बर्फ की उसी चादर पर कैंप लगाए हमारे जवान दिन-रात मुस्‍तैद रहते हैं ताकि पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) के किसी भी नापाक मंसूबे को नाकाम किया जा सके।



यहां जिंदगी की तमाम सुविधाएं किसी काम की नहीं
यहां जिंदगी की तमाम सुविधाएं किसी काम की नहीं

लद्दाख के जिन इलाकों में तनाव की स्थिति है, वे नवंबर से लेकर मार्च तक बर्फ में दबे रहते हैं। इतनी ठंड पड़ती है कि अगर शरीर का कोई हिस्‍सा खुला रह जाए तो समझिए गया। इतने कम तापमान पर हाइपोथर्मिया, हाइपॉक्सियां, पल्‍मोनरी ओडेमा जैसी मेडिकल कंडीशंस का खतरा रहता है। भारत के जवानों को इन इलाकों में तैनाती का अच्‍छा-खासा अनुभव है मगर चीनी सैनिकों को पहली बार ऐसे हालात का सामना करना पड़ रहा है। अब ड्रैगन आर्मी को एहसास हो रहा है कि भारतीय सेना किस मिट्टी की बनी है। (सांकेतिक तस्‍वीर)



इन हालातों में डटे रहना ही सबसे बड़ी चुनौती
इन हालातों में डटे रहना ही सबसे बड़ी चुनौती

पूर्वी लद्दाख में दोनों तरफ से करीब 50 हजार सैनिक मौजूद हैं। सैन्‍य सूत्रों ने कहा क‍ि अब यह 'बेसिक सर्वाइवल' का सवाल है। कड़ाके की सर्दी अपना असर दिखा रही है और दोनों सेनाओं को अपने सैनिक रोटेट करने पड़ रहे हैं। हमें सियाच‍िन की ऊंचाई पर सेना को तैनात करने का अनुभव प्राप्त है। कड़ाके की ठंड और चीन के साथ विवाद को देखते हुए भारतीय सेना ने पहले ही अमेरिका से इस स्थिति के लिए कपड़े खरीद लिए थे।

(सांकेतिक तस्‍वीर)



-30 डिग्री में भी डटे भारत के 'हिमवीर'
-30 डिग्री में भी डटे भारत के 'हिमवीर'

चीन बॉर्डर के आसपास वाली चोटियों का तापमान -30 डिग्री तक गिर चुका है। सैनिकों को ठंड से निपटने के लिए जरूरी उपकरण, कपड़े और गियर मुहैया कराए गए हैं लेकिन मौसम की मार से बचना मुश्किल है। इसलिए अगली बार जब आप कंबल में लिपटे चाय की चुस्कियां ले रहे हों तो सीमा पर चौकस इन जवानों की हालत का अंदाजा लगाने की कोशिश कीजिएगा, एक सिहरन दौड़ जाएगी।



सीमा पर तनाव सुलझाने को बातचीत जारी
सीमा पर तनाव सुलझाने को बातचीत जारी

एलएसी के पास कठोर मौसम की स्थिति में चीनी और भारतीय सैनिक तैनात हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर पिछले नौ महीने से गतिरोध बना हुआ है। दोनों देश सीमा विवादों को हल करने के लिए सैन्य और राजनयिक वार्ता में भी लगे हुए हैं।





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