चीन को इशारा: भारत-अमेरिका में खास डील, मालाबार अभ्‍यास में जुटेंगी क्‍वाड देशों की नौसेनाएं

नई दिल्‍ली चीन के साथ लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारी तनाव है। दक्षिण चीन सागर में भी हलचल तेज हुई है। इन सबके बीच, ड्रैगन को साफ संदेश देने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया की नौसेनाएं एक साथ जुटेंगी। 13 साल बाद यह मौका आया है जब चारों देशों की नौसेनाएं एक साथ अभ्‍यास करेंगी। दो चरणों में होने वाले मालाबार अभ्‍यास के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर को चुना गया है। वहां इन चारों देशों की मौजूदगी चीन को रत्‍ती भर नहीं भाएगी। ऊपर से उसे और मिर्ची तब लगेगी जब भारत और अमेरिका के बीच मंत्री स्‍तर की 2+2 मीटिंग में खास सैन्‍य समझौता हो जाएगा। दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच यह बैठक 26-27 अक्‍टूबर को होनी है। ऑस्‍ट्रेलिया ने भरी हामी, चीन के खिलाफ खास चौकड़ीसोमवार को भारत ने घोषणा करते हुए कहा कि ऑस्‍ट्रेलियाई नौसेना भी मालाबार युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा लेगा। नवंबर में होने वाले इस युद्धाभ्‍यास में अब कुल चार देश (भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, अमेरिका और जापान) हो गए हैं जिन्‍हें 'क्‍वाड' भी कहते हैं। साल 2017 में इस जुड़ाव की दोबारा शुरुआत होने के साथ ही, मालाबार अभ्‍यास में तीन देश (भारत, अमेरिका और जापान) शामिल होते रहे हैं। पिछले साल सितंबर में जापान के तट पर जबर्दस्‍त युद्धाभ्‍यस हुआ था। BECA से बढ़ेगी भारत-अमेरिका के बीच साझेदारीइसी महीने भारत और अमेरिका के बीच बेहद अहम मीटिंग होनी है। 26-27 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने समकक्ष मार्क एस्‍पर और विदेश मंत्री एस जयंशकर उनके समकक्ष माइक पोम्पिओ से मुलाकात करेंगे। इस 2+2 बातचीत में बेसिक एक्‍सचेंज ऐंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA) पर बात बन सकती है। यह समझौता होने पर अमेरिका लॉन्‍ग-रेंज नेविगेशन और मिसाइल टारगेटिंग के लिए भारत को ऐडवांस्‍ड सैटेलाइट और टोपोग्रैफिकल डेटा उपलब्‍ध कराएगा। गहरी होती जा रही भारत और US की दोस्‍तीभारत और अमेरिका के बीच 2002 में 'जनरल सिक्‍योरिटी ऑफ मिलिट्री इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट' हुआ था। इसके बाद 2016 में 'लॉजिस्टिक्‍स एक्‍सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' हुआ। 2018 में 'कम्‍युनिकेशंस, कम्‍पैटिबिलिटी ऐंड सिक्‍योरिटी एग्रीमेंट' हुआ। फरवरी 2019 में जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत आए थे, तब BECA पर चर्चा शुरू हुई थी। चीन की वजह से पास आए क्‍वाड देशBECA को लेकर तेजी और क्‍वाड देशों का एक साथ आना सीधे तौर पर चीन को संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को 'अहम सुरक्षा चुनौती' करार दिया था। भारत ने क्‍वाड में शामिल हर देश के साथ 'लॉजिस्टिक्‍स एक्‍सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' साइन कर रखा है। इससे उसे इन देशों के मिलिट्री बेसेज से संसाधन हासिल होते हैं। क्‍वाड देशों के रिश्‍तों में चीन की वजह से और निकटता देखने को मिली है। खासतौर से दक्षिण चीन सागर में जिस तरह ड्रैगन ने कब्‍जा बढ़ाना चाहा, उससे कई देशों को दिक्‍कत है।


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