ब्लॉगः कई देशों के लिए सबक हो सकती है अजरबैजान और आर्मीनिया की लड़ाई

आपस में लड़ते हुए दो देश वास्तव में कैसे दिखते हैं, यह समझ में तब आता है जब हमारी नजर ऐसे दो देशों की लड़ाई पर जाती है जिनसे हमारा कोई सीधा जुड़ाव न बनता हो। वरना होता यह है कि दोनों में से कोई एक हमें कम बुरा या ज्यादा बदमाश प्रतीत होता है। ऐसा होते ही हमारी सहानुभूति किसी एक के पक्ष में चली जाती है। इसके बाद पूरी बुराई हमें दूसरे पक्ष में नजर आने लगती है और लड़ाई के चरित्र का सवाल गायब हो जाता है। चरित्र का सवाल इसलिए अहम है क्योंकि कोई युद्ध इंसानियत के लिए दवा है या जहर, इसका फैसला इसी से हो सकता है, और नजर में थोड़ी सी निष्पक्षता न हो तो इसका परीक्षण मुश्किल हो जाता है।

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