डीएम ने कफील खान (Dr Kafeel Khan) के भाषण के कुछ हिस्से ही पढ़े, जबकि असली मंशा को नजरअंदाज कर दिया गया। कोर्ट ने डीएम की आलोचना करते हुए कहा कि डॉक्टर कफील का भाषण आपसी एकता को बढ़ावा देने वाला था। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि दिसंबर में भाषण देने के बाद फरवरी में कफील पर रासुका क्यों लगाया गया।
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