पूर्वी लद्दाख में चीन से लगे बॉर्डर पर जो हालात हैं, उसे देखते हुए एयरफोर्स की अहमियत बहुत बढ़ गई है। जिस तरह से एयरफोर्स ने दिन-रात एक करके चीनी सैनिकों के जमावड़े के जवाब में भारतीय जवानों को बॉर्डर के पास पहुंचाया, उससे IAF की कैपेबिलिटी का पता चलता है। महज कुछ दिनों में ही भारी गोला-बारूद सीमा पर पहुंचा दिया गया है। इसी बीच, एयरफोर्स ने 12 सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दे दिया है। रूसी लाइसेंस के तहत बनने वाले यह जेट्स हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) तैयार करेगी। भारत के पास पहले से ही 272 ऐसे लड़ाकू विमान मौजूद है। यानी अब यह फाइटर जेट IAF का सबसे भरोसेमंद सिपाही बन चुका है। दिलचस्प बात ये है कि चीनी एयरफोर्स भी सुखोई-30 लड़ाकू विमान इस्तेमाल करती है। आइए आपको बताते हैं दोनों में फर्क क्या है।
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