संजय झा का सोनिया पर वार, कही बड़ी बात

नई दिल्ली संजय झा चर्चा में हैं। वह कांग्रेस के प्रवक्ता थे। उन्हें पद से हटा दिया गया है क्योंकि उन्होंने दो ऐसे लेख लिखे, जो पार्टी नेतृत्व के खिलाफ माने गए। संजय झा की पहचान कांग्रेस के प्रवक्ता के तौर तक सीमित नहीं है। वे भारत में ‘डेल कार्नेगी ट्रेनिंग ऑपरेशंस’ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। आईटीसी थ्रेडनील एसेट मैनेजमेंट (यूके) के वाइस प्रेसीडेंट रह चुके हैं। एलायंस कैपिटल (न्यूयॉर्क), बैंक ऑफ अमेरिका और एएनजेड ग्रिंडलेज बैंक में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। एक प्रसिद्ध क्रिकेट पोर्टल के संस्थापक रहे। क्रिकेट से जुड़ी कई किताबें भी लिखीं। संजय झा से बात की एनबीटी के नैशनल पॉलीटिकल एडिटर नदीम ने। बातचीत के प्रमुख अंश.. सवाल- राजनीति से अलग आपकी एक दुनिया थी, फिर कांग्रेस तक आपकी पहुंच कैसे बनी? जवाब- मैं इस सोच के साथ बड़ा हुआ हूं कि कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है, जिसमें सबको साथ लेकर चलने की कूवत है। कांग्रेस में न रहते हुए भी वे सारी कोशिशें करता रहा, जिससे कांग्रेस मजबूत हो। 2004 के चुनाव से पहले मेरी मुलाकात सोनिया गांधी से हुई। मैंने पर्दे के पीछे रहकर कांग्रेस के लिए काम शुरू किया। 2012 में कांग्रेस को सोशल मीडिया पर लाने वाला भी मैं ही हूं। 2013 में मुझे प्रवक्ता बनाया गया, यहीं से औपचारिक तौर पर कांग्रेस के साथ मेरा सफर शुरू हुआ। सवाल-आपके जो लेख विवाद का विषय बने, उसे आपने किन परिस्थितियों में लिखा? जवाब- पांच साल के दरमियान पार्टी दो लोकसभा चुनाव हार गई। दोनों चुनाव मिलाकर भी वह 100 सीट तक नहीं पहुंच पाई। यूपी-बिहार में तीन दशक से हाशिए पर है, वेस्ट बंगाल में 43 साल से सत्ता से बाहर है। गुजरात में सत्ता से हटे ढाई दशक हो चुके हैं। ओडिशा में बीस साल से कांग्रेस हार रही है। दिल्ली, हरियाणा लगातार दो चुनाव हार चुकी है। लेकिन पार्टी के अंदर कोई भी इस पर चर्चा करने की जरूरत ही नहीं समझ रहा। मध्य प्रदेश में पार्टी ने 15 साल बाद 2019 में किसी तरह सत्ता में वापसी की, लेकिन सवा साल के अंदर उसे इसलिए सत्ता गंवानी पड़ गई कि पार्टी नेतृत्व को ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे प्रभावी नेता से बात करने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। एक कांग्रेसी होने के नाते अगर मैंने अपनी चिंता जाहिर की तो इसमें गलत क्या है? सवाल-आप अपनी चिंता पार्टी प्लैटफॉर्म पर भी तो जाहिर कर सकते थे जवाब- सच यह है कि पार्टी में ऐसा कोई प्लैटफॉर्म ही नहीं है, जिस पर अपनी बात रखी जा सके। पार्टी में मेरी तमाम नेताओं, कार्यकर्ताओं से बात होती रहती है, सभी मौजूदा वक्त में निराश हैं, लेकिन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। फिर मैंने सोचा कि मैं ही जोखिम उठाता हूं। सवाल-लेकिन आपने जो लिखा, उसे नेतृत्व पर हमला माना गया है जवाब- मेरे दोनों लेख पढ़िए। मैंने क्या गलत लिखा है? मैंने यही तो लिखा है कि देश को कांग्रेस ही बचा सकती है, लेकिन कांग्रेस को बदलना होगा। अगर इसको लेकर सोनिया जी नाराज हो जाती हैं तो मेरे पास कहने को कुछ भी नहीं है। सवाल-कांग्रेस के अंदर गड़बड़ी के मूल में कौन लोग हैं? जवाब-कांग्रेस के अंदर एक ‘मंडली’ है, जिसका पार्टी पर कब्जा है। वह पार्टी को बदलने नहीं दे रहे हैं, अच्छे लोगों को ऊपर आने नहीं दे रहे हैं। सवाल- क्या यह सच है कि कांग्रेस के अंदर सोनिया और राहुल के बीच नेता बंटे हुए हैं? जवाब- मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। इतना कह सकता हूं कि दिल्ली में बैठकर जो दरबारी राजनीति होती है, उसी कारण कांग्रेस कमजोर हुई है। सवाल-प्रियंका के राजनीति में सक्रिय होने के बाद क्या तीसरा ‘पॉवर सेंटर’ भी स्थापित हो रहा है? जवाब- वह सब मैं नहीं जानता, लेकिन उन्हें षडयंत्र की राजनीति पसंद नहीं। उनके साथ जितना मैंने काम किया है, मुझे उनमें नेतृत्व क्षमता दिखती है। वह जब लोगों से मिलती हैं, तो एक रिश्ता कायम करती हैं। वह सबको साथ लेकर चलने की क्षमता रखती हैं। सवाल- क्या पार्टी की कमान फिर से को देने की तैयारी है? जवाब- मैं राहुल जी की इसलिए तारीफ करता हूं कि उन्होंने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। इसके बाद सीडब्लूसी की जिम्मेदारी बनती थी कि वह नए अध्यक्ष का चुनाव करे। सवाल-वैसे अब आपका आगे का रास्ता क्या होगा, क्या बीजेपी से भी जुड़ सकते हैं? जवाब- कांग्रेस में किसी पद पर न रहते हुए भी मैंने कांग्रेस को मजबूत करने का काम किया है। आज की तारीख में बस इतना कह सकता हूं कि कांग्रेस को अपना लोकतंत्र मजबूत करना होगा।


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