कोरोना को इतना डरावना भी न बनाएं कि...

नई दिल्लीः यूपी के शामली में गुरुवार को क्वारंटीन वॉर्ड में भर्ती कोरोना के एक संदिग्ध ने खुदकुशी कर ली। कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर उसे क्वारंटीन वॉर्ड में भर्ती किया गया था। लखीमपुर में एक प्रवासी मजदूर परिवार से मिलने के लिए क्वारंटीन केन्द्र से भागा, पर अधिकारी उसे ढूंढ लाए। गुरुवार को वह फिर भागा, लेकिन यह पता चलने पर कि पुलिस उसे तलाश रही है, उसने खुदकुशी कर ली। सहारनपुर में एक सरकारी कर्मचारी ने कोरोना के खौफ में जान दे दी। उसने सूइसाइड नोट में लिखा - मैं कोरोना से डरा हुआ हूं। मुझे बच्चों की चिंता है। मुझे लगता है कि मैं कोरोना का शिकार हो गया हूं। दस दिन से नहीं सोया हूं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच देश भर से ऐसी और भी कई घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें कोरोना मानसिक स्तर पर भी लोगों को कमजोर बना रहा है। अकेले यूपी में ही कोरोना से संबंधित मामलों में पांच लोग खुदकुशी कर चुके हैं। रही-सही कसर तब पूरी हो जाती है जब किसी के कोरोना पॉजिटिव होने पर उसी के नजदीकी लोग उसे हिकारत की नजरों से देखने लगते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग कोरोना मरीजों का सोशल बॉयकॉट कर रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि यह बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। अगर लोग एक-दूसरे को सपोर्ट नहीं करेंगे, तो नतीजा सभी भुगतेंगे। इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (IHBAS) में साइकायट्री डिपार्टमेंट के असोसिएट प्रोफेसर डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि हमें यह सोचना है कि इससे पहले भी प्लेग जैसी कई महामारी हुई हैं और आकर चली भी गईं। यह भी नहीं रुकेगी। फोर्टिस हेल्थकेयर के साइकायट्रिस्ट डॉ. समीर पारेख कहते हैं कि अगर टेस्ट पॉजिटिव आ गया है तो बार बार इसके बारे में ना सोचें, न ही गूगल करें। आपके पास बस भरोसेमंद सोर्स से ली गई सही जानकारी होनी चाहिए। एम्स के साइकायट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार कहते हैं कि मरीज को लगता है कि उसकी वजह से यह बीमारी किसी को ना हो जाए। अगर ऐसा हुआ, तो सोसायटी उसे कैसे ट्रीट करेगी। यह सारा डर मानसिक संतुलन बिगाड़ रहा है और सूइसाइड जैसे कुछ मामले सामने आए हैं। कुछ इस तरह करें अपनी मदद सोशल मीडिया में आ रही सूचनाओं पर यूं ही यकीन न करें। सिर्फ भरोसेमंद सोर्स से जानकारियां लें। वहां हर जानकारी सही नहीं है। आइसोलेशन में हैं तो दिन का शेड्यूल बनाएं, घर के काम से लेकर अपनी हॉबी तक शामिल करें। परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं, म्यूजिक सुनें। परेशानी है तो एक्सपर्ट से बात करें। जिंदगी में तीन-चार हफ्ते अलग रहना या क्वारंटीन का पालन करना कोई बड़ी बात नहीं है।


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