नई दिल्ली ने पूरी दुनिया में कहर मचाया हुआ है। करीब 13 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 3 लाख लोग संक्रमित हैं। भारत में भी अब तक 327 मामलों की पु्ष्टि हो चुकी है और 4 लोगों की मौत हो गई है। तेजी से फैल रही इस महामारी को रोकने के लिए दुनिया भर के देश तमाम उपाय कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसकी वैक्सीन नहीं बन सकी है। तमाम देश वैक्सीन बनाने के लिए भी पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। अभी वायरस का कोई इलाज मौजूद नहीं है और ऐसी स्थिति में सिर्फ इससे बचाव ही किया जा सकता है। यही वजह है कि जनता कर्फ्यू से लेकर कुछ जगहों पर लॉकडाउन करने जैसे अहम कदम उठाए जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि अभी वैक्सीन आने में साल भर से 18 महीने का वक्त लग सकता है और इतने दिन तक लॉकडाउन की स्थिति में नहीं रहा जा सकता। ये भी पढ़ें- वैक्सीन की खोज में कहां तक पहुंचा भारत सांस लेने से जुड़ी दिक्कतों और फ्लू के बेहतर इलाज का ईजाद करने वाली भारतीय औषधि कंपनी सिप्ला अगले छह महीने में लाइलाज कोरोना वायरस के इलाज की दवा पेश कर सकती है। अगर ऐसा हो जाता है तो सिप्ला ईजाद करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन सकती है। इसके लिए सिप्ला कंपनी सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर कोरोना की दवा विकसित करने के साथ ही इस बीमारी में सांस लेने से संबंधित तकलीफों में ली जाने वाली दवा, अस्थमा में ली जाने वाली दवा, एंटी वायरल दवाओं और एचआईवी की दवाओं के इस्तेमाल पर भी प्रयोग कर रही है। ये भी पढ़ें- चीन भी लगा है वैक्सीन बनाने में कोरोना वायरस की शुरुआत चीन से ही हुई थी। चीन में करीब 1000 वैज्ञानिक कोरोना की दवा बनाने के काम में जुटे हैं। ये भी कहा जा रहा है कि एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेस ने कोरोना वायरस की एक वैक्सीन बना भी ली है, जिसे ट्रायल के लिए वॉलिंटियर्स की तलाश की जा रही है। एक चीनी कपनी ने एक जर्मन कंपनी BioNTech में करीब 13.3 करोड़ डॉलर का निवेश करने की पेशकश की है, जो कोरोना वायरस की दवा बनाने में जुटी है। ये भी पढ़ें- अमेरिका ने भी झोंक दी है पूरी ताकत कोरोना वायरस ने अमेरिका को भी बुरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। ऐसे में वहां की भी कई कंपनियां लगातार वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कोरोना वायरस बनाने में अमेरिका की कोशिशें डोनाल्ड ट्रंप की वजह से दब से गई हैं। ट्रंप ने जर्मन फर्म CureVac को अमेरिका की धरती पर कोरोना वायरस की दवा बनाने का न्योता दिया है। बता दें कि कोरोना वायरस के आने से कुछ महीने पहले से ही अथॉरिटीज कुछ साइंटिस्ट की जांच कर रहे हैं, जिन पर आरोप है कि वह चीन के लिए अमेरिका से बायोमेडिकल रिसर्च चुरा रहे थे। ये भी पढ़ें- निजी लैब्स को 4500 रुपये के अंदर जांच की सिफारिश केंद्र सरकार ने शनिवार को निजी प्रयोगशालाओं को प्रत्येक जांच के लिए अधिकतम मूल्य 4500 रुपये तक रखने की सिफारिश की। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से कोविड-19 जांच के मद्देनजर निजी प्रयोगशालाओं के लिए जारी दिशानिर्देश के अनुसार, एनएबीएल प्रमाणित सभी निजी प्रयोगशालाओं को यह जांच करने की अनुमति दी जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार रात को यह अधिसूचित किया गया। दिशानिर्देश के मुताबिक, राष्ट्रीय कार्य बल ने सिफारिश की है कि जांच के लिए अधिकतम 4500 रुपये तक ही वसूले जा सकते हैं। संदिग्ध मामले में स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए 1500 रुपये जबकि अतिरिक्त पुष्ट जांच के लिए तीन हजार रुपये लिए जा सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि दिशानिर्देश का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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