नई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री में किए गए संशोधन को लेकर कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा था। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस योजना को स्वैच्छिक बनाने को लेकर आरोप लगाया कि केंद्र ने अपना हिस्सा घटा दिया है, इससे बड़ा किसान विरोधी कदम नहीं हो सकता है। कांग्रेस के सवाल पर सरकार ने जवाब देते हुए पूर्व वित्त मंत्री के आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार ने कहा कि यह उनकी समझ की कमजोरी को दर्शाता है। सच्चाई वह नहीं है जो कांग्रेस दावे कर रही है। केंद्र सरकार ने दिया कांग्रेस को पूरा जवाब भारत सरकार ने 2016 में इस आशय से शुरू की थी कि किसान पर कम प्रीमियम का बोझ पड़े। इस योजना में किसान बीमा राशि का खरीफ में 2 प्रतिशत, रबी में 1.5 प्रतिशत और बागवानी के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत देता है। बाकी प्रीमियम केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा 50:50 के अनुपात में वहन किया जाता है। मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार किए गए प्रावधानों में भी किसान द्वारा दिए जाने वाली प्रीमियम राशि दर (1.5 प्रतिशत रबी में, 2 प्रतिशत खरीफ में एवं 5 प्रतिशत) दर बागवानी इत्यादि फसलों में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया। कांग्रेस पहले भी झूठ का सहारा लेती थी और अब भी झूठ का सहारा लेकर भ्रम पैदा करना चाहती है। किसानों को अतिरिक्त प्रीमियम नहीं सरकार द्वारा स्वीकार किए गए प्रावधानों के अनुसार, सिंचाई की उपलब्धता वाले जिलों में किसी भी फसल की प्रीमियम दर अगर 25 प्रतिशत से अधिक होगी और असिंचित जिलों के लिए यह दर 30 प्रतिशत से अधिक होगी, तब भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रीमियम सब्सिडी 25 और 30 प्रतिशत क्रमश: प्रीमियम दर का 50 प्रतिशत हिस्सा होगा। बाकी बची सब्सिडी राज्य सरकार वहन करेगी लेकिन किसान को कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं देना होगा। किसानों की इनकम बढ़ाने पर जोर सरकार के इस कदम की मंशा अधिक प्रीमियम वाली फसलों के ज्यादा दर के बारे में राज्य सरकारों को अध्ययन करने के लिए प्रेरित करने के लिए है। केंद्र सरकार यह चाहती है कि फसलो की उपज, मौसम सलाह एवं उपज के आंकड़ों में के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने में आ रही खामियों को दूर किया जाए। सरकार इस कदम के जरिए किसानों की आय बढ़ाना चाहती है। सूखाग्रस्त जिलों का होगा विशेष अध्ययन केंद्र सरकार का मानना है कि देश के 151 जिलें जहां पानी की कमी है, उसका विस्तार से अध्ययन किया जाए। सरकार ये भी चाहती है कि इन जिलों में फसल बीमा एवं अन्य जोखिमों का पता किया जाए, जिससे किसानों के लिहाज से ज्यादा लाभकारी योजनाएं बनाई जाए। वैकल्पिक पंजीकरण की सुविधा 151 जिलों में प्रभावी रहेगी वर्तमान में जारी वैकल्पिक पंजीकरण की योजना इन 151 जिलों में प्रभावी रहेगी और नई योजना बनाने के बाद ही वहां राज्य सरकार के सहयोग से नई योजना लागू की जाएगी। तब तक वहां के किसानों को वर्तमान योजना का लाभ मिलता रहेगा। पूर्वोत्तर राज्यों को 10 पर्सेंट देना होगा प्रीमियम बदलाव के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रीमियम की राशि घटा दी गई है। पहले उन्हें 50 फीसदी प्रीमियम देना पड़ता था, जिसे घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है।प्रीमियम सब्सिडी का 90 प्रतिशत भार केंद्र सरकार वहन करेगी। इस बदलाव से यह आशा की जाती है कि वहां की राज्य सरकारें अधिक फसलीय क्षेत्रों को अधिसूचित करती रहेंगी, और वहां के फसलीय क्षेत्रों का विस्तार होता रहेगा। सार्वजनिक बीमा कंपनियों की भागीदारी 50% पिछले 3 वर्षों में बीमा कंपनियों ने कुल प्राप्त प्रीमियम के 85 प्रतिशत से अधिक की राशि का दावों के रूप में भुगतान किया है और बीमा योजना का उद्देश्य के अनुसार प्रभावित राज्यों एवं जिलों में फसल क्षति के अनुपात से मुआवजा दिया है। बीमा कंपनियों ने पिछले तीन वर्षों में लगातार आपदा प्रभावित राज्यों के किसानों को प्रीमियम से भी अधिक बीमा राशि का भुगतान किया गया है। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु 184%, छत्तीसगढ़ 168%, उड़ीसा 134%, हरियाणा 131%, कर्नाटक 104%। इस योजना के क्रियान्वयन में सार्वजनिक बीमा कंपनियों की भागीदारी 50% है। किसानों के लिए यह योजना अब स्वैच्छिक किसानों की लंबित मांग को ध्यान में रखते हुए इस योजना को सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक कर दिया गया है। किसानों की मांग के अनुसार नए फसल बीमा उत्पाद भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि किसान अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजना से स्वैच्छिक रूप से जुड़ सकें। बीमा कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बीमा कंपनी अब किसी क्षेत्र में 3 वर्षों तक काम करेंगी। अब जल्द मिलेगा बीमा रकम राज्य सरकार द्वारा दी जानेवाली प्रीमियम सब्सिडी के भुगतान एवं बीमा दावों की गणना के लिए उपज आंकड़े को उपलब्ध कराने में हो रही देरी से किसानों को उचित लाभ देने में देर हो रहा था। नए प्रावधान में अडवांस्ड टेक्नॉलजी द्वारा फसल के नुकसान का आकलन पारदर्शी तरीके से जल्द से जल्य किया जाएगा। इससे किसानों को जल्द बीमा की राशि मिल पाएगी। पिछले चार सालों में दो संशोधन फसल बीमा योजना को किसान हितैषी बनाने के लिए मोदी सरकार ने पिछले चार सालों में दो संशोधन किए हैं। इनमें बीमा कंपनियों की सुनिश्चित जवाबदेही और दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हैं। इस योजनाके लिए केन्द्रीय बजट प्रावधान को बढ़ाकर वर्ष 2020-21 के लिए 15500 रुपये कर दिया गया है।
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