की उम्र 59 वर्ष है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के निवासी हैं। उन्हें लखनऊ की सड़कों पर एक खास साइकल के साथ अकसर देखा जा सकता है। उनके कंधे से टिका हुआ एक कपड़े का झोला रहता है। गले से लटकती तख्ती है, जिसमें पर्यावरण, सड़क सुरक्षा से जुड़ी कई खास बातें लिखी हुई हैं। उनकी साइकल के आगे और पीछे भी दो बड़ी-बड़ी तख्तियां हैं। आगे की तख्ती में पर्यावरण बचाओ का संदेश तो पीछे लगी तख्ती में सड़क सुरक्षा से जुड़ी अहम बातें लिखी हुई हैं। कई लोग तो कृष्णानंद राय को अब '' भी कहते हैं। एनबीटी ऑनलाइन ने उनसे खास बात की। कृष्णानंद राय उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सीनियर अकाउंटेंट हैं। उनकी नियुक्ति लखनऊ में है। वह दिसंबर 2020 में अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। कृष्णानंद राय कहते हैं, 'मेरे तीन मुख्य उद्देश्य हैं, नशा उन्मूलन, पर्यावरण, सड़क सुरक्षा। मैं रोजाना तकरीबन 30 से 40 किलोमीटर साइकल चलाता हूं। अकेले जब भी निकलता हूं तो साथ में साइकल ही होती है। मेरी कोशिश है कि हम साइकल से चलें ताकि पर्यावरण प्रदूषित होने से कुछ तो बचाया जा सके। इसके साथ ही हमारा स्वास्थ्य भी इससे बेहतर रहेगा।' सीएम योगी भी कर चुके हैं सम्मानित राय कहते हैं, 'आप ही देखिए आज एयर और वॉटर पलूशन की वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इसका कारण प्रदूषण है। मुझे देखकर कई लोगों ने साइकल से चलना शुरू कर दिया है। मैं इस तरीके से लगभग 40 वर्षों से लोगों को जागरूक कर रहा हूं।' नशे की वजह से क्या युवा, क्या बुजुर्ग सभी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। गुटखा, पान-मसाला, शराब आदि से कैंसर के मामलों में भी इजाफा हुआ है। इन चीजों को रोकना जरूरी है। अब बात करें यदि सड़क सुरक्षा की तो इसे हर शख्स को समझना होगा। अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर के नजदीक मैं लोगों को जागरूक करने की कोशिश करता हूं। यही प्रयास रहता है कि लोग सुरक्षित रहें। मुझे लगता है कि राष्ट्र के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने से बड़ा काम कुछ भी नहीं हो सकता है।' राय को उनके इन प्रयासों के लिए 7 अप्रैल 2018 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा गंगा सेवक सम्मान से नवाजा गया था। 'पूरे परिवार से मिलता है सपॉर्ट'कृष्णानंद राय कहते हैं, 'मेरे पिता कालिका राय भी समाजसेवा के कार्य से जुड़े हुए थे। वह उत्तर प्रदेश पलूशन बोर्ड में ऑडिट प्रभारी थे। मेरे नाना कैलाश राय कमरपुरी भोजपुरी कवि थे। उन्हीं से मुझे कविताओं का शौक पैदा हुआ। मैं आए दिन नदियों की सफाई के लिए पहुंच जाता हूं। अब तो लोग भी इस कार्य में मेरा साथ देने लगे हैं। इस काम में मुझे मेरे घर से भी बहुत सपॉर्ट मिलता है।' जागरूकता के लिए ये काम उत्तर प्रदेश पलूशन कंट्रोल बोर्ड में कार्यरत 59 वर्षीय कृष्णानंद राय कहते हैं, 'मैं लोगों को कई तरीकों से जागरूक करने की कोशिश करता हूं। इन तख्तियों के साथ, साइकल की सवारी के जरिए और कविताओं के माध्यम से। मैंने गंगा की सफाई को लेकर एक छंद लिखा था। इसे लोगों के बीच काफी सराहा जाता है। नदियों की आए-दिन सफाई मेरे जीवन का हिस्सा है। जब इस कार्य में लोगों का साथ मिलता है तो काफी खुशी मिलती है। इन तमाम बातों को लेकर हम सभी को जागरूक होना जरूरी है। आखिर एक पेड़ सभी को शुद्ध हवा देता है तो जिम्मेदारी भी हम सभी की बनती है।'
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