सोशल मीडिया पर जजों की निंदा अवमानना: बोबडे

उन्होंने कहा, ‘जज भी एक सामान्य इंसान होते हैं। बिना पाबंदियों के इस प्रकार की आलोचना से न सिर्फ विवाद पैदा होता है, बल्कि जजों की साख प्रभावित होती है।’ जस्टिस बोबडे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना रोकने के लिए कुछ नहीं कर सकता।

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