तो क्या राज्यों की गलती के चलते पैदा हुआ कोयला संकट? जानें क्या बोले केंद्रीय मंत्री

नई दिल्‍ली देश में बढ़ते के बीच इसे लेकर सियासत भी गरमा गई है। समस्‍या के लिए केंद्र सरकर को कठघरे में खड़ा कर रहे कुछ राज्‍यों पर अब मोदी सरकार ने पलटवार किया है। केंद्रीय कोयला मंत्री ने इसका ठीकरा राज्‍यों पर फोड़ा है। उन्‍होंने बताया कि राज्‍यों को पहले ही कोयला स्‍टॉक बढ़ाने को कहा गया था। कई ने तो कोयला लेने से मना तक किया था। वैसे, उन्‍होंने किसी राज्‍य का नाम नहीं लिया। फिलहाल कुछ भी हो, लेकिन हालात काबू में न किए गए तो देश की बत्‍ती गुल होना तय है। इससे हर किसी पर असर पड़ेगा। मंगलवार को ने कहा, 'मैं किसी राज्य का नाम नहीं लेना चाहता हूं। लेकिन, जनवरी से जून तक हम राज्यों से अनुरोध कर रहे थे कि आप स्टॉक थोड़ा बढ़ाओ। जून में हमें कई राज्यों ने ये भी अनुरोध किया कि हमें कोयला मत भेजो।' जोशी बोले कि बारिश के कारण कोयले की कमी हो गई। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 60 रुपये प्रति टन से 190 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद आयातित कोयला पावर प्‍लांट या तो 15-20 दिनों के लिए बंद हो जाते हैं या बहुत कम उत्पादन करते हैं। इससे घरेलू कोयले पर दबाव पड़ा। सरकार ने कोल इंडिया से दुर्गा पूजा के दौरान बिजली घरों को कोयले की आपूर्ति बढ़ाकर 15.5 से 16 लाख टन प्रतिदिन करने को कहा है। साथ ही 20 अक्टूबर के बाद इसे बढ़ाकर 17 लाख टन प्रतिदिन करने को कहा गया है। देश में जब त्योहार शुरू हो चुके हैं, ऐसे में बिजलीघरों में कोयले की कमी को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया ने सोमवार को बिजली क्षेत्र को 16.15 लाख टन कोयले की आपूर्ति की। कोयले पर बिजली घरों की निर्भरता कोल इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 69 फीसदी बिजली उत्पादन कोयला आधारित प्‍लांटों से होता है। ऐसे में देश के बिजली क्षेत्र के लिए कोयले की आपूर्ति को लेकर कोल इंडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। कंपनी की कुल आपूर्ति का करीब 80 फीसदी कोयला बिजली क्षेत्र को दिया जा रहा है। बताया जाता है कि बिजली घरों को जितने कोयले की जरूरत है, सप्‍लाई की जा रही है। यह और बात है कि स्‍टॉक बढ़ नहीं पा रहा है। कारण है कि कोयले की आपूर्ति जरूरत के अनुसार ही है। उन्होंने (बिजली घरों) अपने भंडार को भरने पर ध्यान नहीं दिया। कोल इंडिया ने देशभर में बिजली घरों को चालू महीने में पिछले चार दिन में कोयले की आपूर्ति बढ़ाकर 15.1 लाख टन कर दी है। कंपनी ने कहा कि वह कोयले के परिवहन के लिए पर्याप्त निकासी उपाय भी कर रही है। अक्टूबर के दौरान कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों को औसत आपूर्ति अब तक 14.3 लाख टन प्रतिदिन रही है। यह अब पिछले चार दिनों में बढ़कर 15.1 लाख टन हो गई है। क्‍या है बिजली घरों में कोयले की स्थिति? ताजा आंकड़े बताते हैं कि कोयले के चार दिन से कम स्‍टॉक वाले बिजली घरों की संख्या रविवार को बढ़कर 70 हो गई। यह एक सप्ताह पहले तीन अक्टूबर को 64 थी। 1,65,000 मेगावाट से अधिक स्थापित क्षमता वाले कुल 135 संयंत्रों में से 70 बिजली घरों में 10 अक्टूबर 2021 को चार दिन से भी कम का कोयला बचा था। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) इन 135 बिजली घरों की निगरानी करता है। सीईए की बिजली संयंत्रों के लिए कोयला स्‍टॉक पर ताजा रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि सात दिनों से भी कम कोयला भंडार वाले बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़कर 115 हो गई, जो इससे पिछले सप्ताह 107 थी। राज्‍यों के फूल रहे हाथ-पांव कोयला संकट के चलते राज्‍यों के हाथ-पांव फूल रहे हैं। वो केंद्र से मदद की आस लगा रहे हैं। कई राज्‍यों के बाद इस लिस्‍ट में राजस्‍थान का नाम भी जुड़ गया है। उसने बताया है कि मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए वह कड़ा संघर्ष कर रही है। राज्‍य सरकार ने केंद्रीय कोयला सचिव अनिल जैन को कोल इंडिया से कोयले की सप्‍लाई बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि ये कहना कि कोयले की कोई कमी नहीं है, बेईमानी है। कोयले की कमी है, सबको पता है, राज्य संकट में हैं और संकट से निकालने की जि‍म्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है। इसके पहले दिल्‍ली, बिहार, केरल सहित कई राज्‍य कोयले की किल्‍लत की बात कह चुके हैं। दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि पूरे देश में बिजली की स्थिति ‘बेहद नाजुक’ है। वहीं, उनके कैबिनेट सहयोगी सत्येंद्र जैन ने दावा किया था कि दिल्ली सरकार को महंगी गैस-आधारित और ज्‍यादा बाजार दर पर बिजली की खरीद करनी पड़ती है, क्योंकि एनटीपीसी ने शहर में बिजली की आपूर्ति आधी कर दी है। जैन ने कहा कि केंद्र को कोयला संकट की बात माननी चाहिए और उसे इनकार की मुद्रा के बजाय समस्या से निपटना चाहिए। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र को पत्र लिखा है। पंजाब भी बिजली कटौती का सामना कर रहा है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने घर पर बिजली विभाग की बैठक बुलाई थी। इसमें यह फैसला लिया गया था कि किसी भी हाल में शाम 6 बजे से सुबह 7 बजे कोई बिजली कटौती नहीं होगी। बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार भी कोयले की गंभीर किल्‍लत की बात स्‍वीकार कर चुके हैं। वहीं, केरल सरकार ने बिजली कटौती पर 19 अक्‍टूबर को फैसला लेने को कहा है। गृह मंत्री अमित शाह भी ऐक्‍शन में देश में कोयला संकट की खबरों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बिजली मंत्री आर के सिंह और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बैठक की थी। यह बैठक करीब एक घंटे चली थी। इस दौरान तीनों मंत्रियों ने बिजली संयंत्रों को कोयले की उपलब्धता और इस समय बिजली की मांग पर चर्चा की थी। क्‍यों घटा कोयले का स्‍टॉक? बिजली संयंत्रों में कोयले के भंडार में कमी होने के चार कारण हैं। इनमें इकनॉमिक रिकवरी के कारण बिजली की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी, कोयला खदानों में भारी बारिश से कोयला उत्पादन और ढुलाई पर प्रतिकूल प्रभाव, आयातित कोयले की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और मॉनसून से पहले पर्याप्त कोयला स्टॉक न करना शामिल हैं।


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